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शादियों का खर्च ?

Posted On: 28 Jun, 2012 में

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अभी हाल में परिवार की एक शादी में सम्मलित हुआ. चूँकि परिवार की शादी थी इसलिए व्यवस्था में भी मेरा सहयोग रहा. शुरू से सब कुछ बड़े नजदीक से देखा. करीब चार घंटों तक चलने वाली और सात-आठ सौ मेहमानों की दावत पर लाखों का खर्च मन में कई सवाल छोड़ गया.

- क्या शादियाँ केवल परिवार के लोगों के बीच सादगी किन्तु गरिमा के साथ नहीं होनी चाहिए?
- क्या खाने के अनेकों व्यंजनों के स्थान पर सीमित, स्वादिष्ट और पोष्टिक व्यंजन नहीं बनने चाहिए?
- क्या शादी पर किया गया लाखों का खर्च कम करके शेष धन को वर-वधु के भविष्य के लिए नहीं सुरक्षित करना चाहिए?
- क्या विवाह पर होने वाला लाखों का खर्च ही कन्या भ्रूण हत्या का कारण तो नहीं.

ऐसे और भी अनेक सवाल मन में आये , किन्तु कभी न कभी तो सादगी से विवाह की शुरुआत होगी ऐसा विश्वास है.

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bharodiya के द्वारा
June 29, 2012

राजीव भाई नमस्कार शादी का समारोह गरीमापूर्ण ही है । लेकिन अति हो गई है, जरूरत से ज्यादा खर्च किया जाता है । मध्यम खरचा हो ऐसा समारोह जरूरी भी है । सिर्फ दिखावे के लिए नही होता ये, वर-वधु पर सामाजिक दबाव का ठप्पा लगा दिया जाता है । उन में जब तू तू मैं मैं शरू हो जाती है तो अलग होने का नाम ही न ले । उन्हें याद आ जाता है की उसे घोडे पे बैठा के लोग नाचे थे वो मजाक नही था । लोग भुख्खड नही है की सिर्फ खाने के लिये आये थे, शादी में शामिल होने आये थे । काफी सामाजीक दबाव बनते है जो पति पत्नि को अलग होने से रोकते हैं । खान पान में खरचा कम किया जा सकता है, सादगी से । पकिस्तान में ये चलन चला है । भारत में ईन्दिरा के समय कायदे से कंट्रोल किया हुआ था । लेकिन लोग दुसरों के घर लड्डु छुपा देते थे और खर्चा कर ही देते थे । बाद में बाजारवादी सरकारने कंट्रोल उठा लिया । कन्या भ्रुण हत्या का जिम्मेदार डॉक्टरी सायंस है जो बता देता है पेट में लडका है या लडकी, और लडके की चाह । लडके की चाह एक मजबूरी है भारत में । बुढे और लाचार आदमी की जिन्दगी के आखरी दिनों की जिम्मेदारी सरकार या कोइ संथा उठाती नही है । दहेज और शादी का खर्च बिलकुल जिम्मेदार नही हो सकता कम से कम आज की तारिख में । आदमी जब बच्चा पैदा करता है तब वो जवान होता है, आत्मविश्वास से भरा होता है । उस के सामने पूरी लाईफ पडी है, २०-२५ साल के बाद होने वाले खरचे से नही डरता ।

dineshaastik के द्वारा
June 29, 2012

राजीव जी, आपके विचारों से पूर्णतः सहमत…….

    Rajeev Varshney के द्वारा
    June 30, 2012

    धन्यवाद, दिनेश जी.


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