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महिला दिवस और हम

Posted On: 20 Mar, 2013 Others में

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अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस आया और चला गया . इस अवसर पर वातानुकूलित सभागारों में अनेकों गोष्ठियां हुई . बड़े बड़े वादे और दावे किये गए , भाषण दिए गए . सरकार की ओर से अनेकों घोषणाए की गयी . किन्तु क्या किसी सभ्य समाज में महिलाये यही सब कुछ चाहती है ?
नहीं ! महिलाये तो बस यह चाहती है की समाज और उनके अपने परिवार के लोग
-उनकी भावनाओं का सम्मान करें
-उनके सपनों का सम्मान करें
-उनकी आज़ादी का सम्मान करें
-उनकी योग्यता का सम्मान करें
-उनकी सुरक्षा का सम्मान करें
-उनकी निजता का सम्मान करें
-उनकी सहनशीलता का सम्मान करें
और सबसे बढ़ कर उनके सम्मान का सम्मान करें
बस यही है हमारी मात्र शक्ति की सभ्य समाज से अपेक्षा और हमारा उनके प्रति कर्तव्य .

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Manoj Kumar Manjul के द्वारा
March 22, 2013

महिलाओं को दुर्गा की तरह पूज्यनीया कहा गया है। परन्तु वे हमेशा से उपेक्षित रही हैं, यदि हम उनका आदर करना सीख जाऐं तो हमारा परिवार और समाज दोनों ही खुशहाल हो जायगा। !!बस यही है हमारी मातृ शक्ति की सभ्य समाज से अपेक्षा और हमारा उनके प्रति कर्तव्य !!   धन्यवाद !


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