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Rajeev Varshney


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नवें आसमान पर भाजपा

Posted On: 18 Sep, 2014  
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Others Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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चौदह वर्षों का उपवास

Posted On: 25 Aug, 2014  
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social issues में

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लोकसभा का एंग्री यंग मेन

Posted On: 8 Aug, 2014  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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लम्बा चुनाव अभियान

Posted On: 18 May, 2014  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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अब कोई आश्चर्य नहीं होता……..

Posted On: 27 May, 2013  
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Others sports mail पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

जय श्री राम राजीव जी बहुत सही लिखा आप दल आराजक लोगो का समूह है जिसके नेता केजरीवाल बड़े नौटंकीबाज़ है जब भी उनके विधायल या सचिव या पार्टी के नेता किसी अपराध में जेल जाते ट्विट्टर में केजरीवाल कहते मोदी का काम है इस बेशर्म नेता को ये भी नहीं मालूम की देश के प्रधान मंत्री से कैसे बात की जाती आज भी जब एक विधयक पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर पकड़ा गया केजरीवाल ने सड़क जाम करवा दी जिससे आम पब्लिक को बहुत तकलीफ हुई बहुत से बीमार हस्पताल नहीं जा सके लेकिन केजरीवाल उनका समर्थन करता रहा इस आदमी ने राजनीती को खराब कर दिया लेकिन इसने पत्रकारों को खरीद लिया ४० को दिल्ली के स्कुलो की मैनेजमेंट कमेटी में रखवा दिया और ये फोर्ड फाउंडेशन के एजेंट की तरह काम कर रहा है मान के मामले में भी बेशर्मी दिखाई ये समझता ये सही बाकी सब गलत देश और दिल्लिमका दुर्भाग्य की ये दिल्ली का मुख्यमंत्री बन गया.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

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के द्वारा: Rajeev Varshney Rajeev Varshney

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राजीव भाई नमस्कार शादी का समारोह गरीमापूर्ण ही है । लेकिन अति हो गई है, जरूरत से ज्यादा खर्च किया जाता है । मध्यम खरचा हो ऐसा समारोह जरूरी भी है । सिर्फ दिखावे के लिए नही होता ये, वर-वधु पर सामाजिक दबाव का ठप्पा लगा दिया जाता है । उन में जब तू तू मैं मैं शरू हो जाती है तो अलग होने का नाम ही न ले । उन्हें याद आ जाता है की उसे घोडे पे बैठा के लोग नाचे थे वो मजाक नही था । लोग भुख्खड नही है की सिर्फ खाने के लिये आये थे, शादी में शामिल होने आये थे । काफी सामाजीक दबाव बनते है जो पति पत्नि को अलग होने से रोकते हैं । खान पान में खरचा कम किया जा सकता है, सादगी से । पकिस्तान में ये चलन चला है । भारत में ईन्दिरा के समय कायदे से कंट्रोल किया हुआ था । लेकिन लोग दुसरों के घर लड्डु छुपा देते थे और खर्चा कर ही देते थे । बाद में बाजारवादी सरकारने कंट्रोल उठा लिया । कन्या भ्रुण हत्या का जिम्मेदार डॉक्टरी सायंस है जो बता देता है पेट में लडका है या लडकी, और लडके की चाह । लडके की चाह एक मजबूरी है भारत में । बुढे और लाचार आदमी की जिन्दगी के आखरी दिनों की जिम्मेदारी सरकार या कोइ संथा उठाती नही है । दहेज और शादी का खर्च बिलकुल जिम्मेदार नही हो सकता कम से कम आज की तारिख में । आदमी जब बच्चा पैदा करता है तब वो जवान होता है, आत्मविश्वास से भरा होता है । उस के सामने पूरी लाईफ पडी है, २०-२५ साल के बाद होने वाले खरचे से नही डरता ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

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मनमोहन जी ने लालकिले पर झंडा फहराने के बाद जो नौकरशाहों द्वारा लिखा भाषण पढ़ा है ,वो बहुत निराशाजनक है .फिर वही बाते ,वादे जो ये सत्ताधारी वर्ग हमेशा से करते आया है,कब बंद होगा ये स्वांग जो देश के साथ ये लोग करते आये है .आज संविधान और संसद की आड़ लेकर अन्ना हजारे से बच रहे ये लोग ,कानून की दांव पेंच लगाकर देश को गुमराह कर रहे है ,ये कायरतापूर्ण है और इसे सहना और भी कायरतापूर्ण है .जो लोकपाल बिल ये पिछले ६४ सालो में नहीं लाये और जो अब कर रहे है इसे देखना बहुत कष्ट दाई है.नेता और नौकरशाहओ के घर काले धन से मालामाल है ,सरकारी सुविधाओ का दुरपयोग करने वाले ,लाल बत्ती में घुमाने वाले अन्ना जी को कभी सफल नहीं होने देंगे.संसद अपराधिक लोगो से भरा पड़ा है,आज आम आदमी कैसे नेताओं पर विस्वास करे की ये कब देशहित की बाते करेंगे .कल अन्ना हजारे जी को अनुमति नहीं दी गई वैसे देशद्रोही कुछ भी बोल के चले जाते है जजाहिर है नेताओ को खतरा अन्ना से ज्यादा है ,देशद्रोहियों से कम.ये अपनी सभा में पैसे से भीड़ लाते है पर जब आमजनता अन्ना के साथ आना चाहती है तो ये कानून का उपयोग कर रहे है ,सत्ता वर्ग जो भी कर रहा है ये घोर निंदनीय है .अन्ना के चरित्र हनन में पूरी सरकार जुट गयी है ,जिससे पता चलता है की ये लोग डर गए है..घबरा गए है की इनके दिन ख़त्म होने को है ..प्रजातंत्र को पैसा तंत्र में तब्दील करने वाले लोग ..संसद में छुपकर देश को कब तक गुमराह करेंगे ..कब तक ये लोग शहीदों के बलिदान को भुनाते रहेंगे ..१५ अगस्त को सांकेतिक पर्व में तब्दील कर कब तक रटे रटाये भासनो का इस्तेमाल करते रहेंगे .देश को गुमराह करते रहेंगे..अन्ना जी को भले ही कल जेल में बंद कर दिया जाये लेकिन उनके विचारो को ये नेता ,अधिकारी बंद नहीं कर सकते.....आगे देखना है हमारा प्रजातंत्र किस और करवट लेता है....या बस नेताओ औए अधिकारी वर्ग का गुलाम हो कर रह जाता है

के द्वारा:




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